गणना - श्लोक पद 7

गणना

पद 7

कर्पन्यदोशोपतस्वभवः हम अहाँ सभसँ आग्रह करैत छी जे धर्ममे सम्मिलित होइ। देवरायः हम अहाँक शिष्य छी।

अनुवाद

.. 2. 7। करूणाक करुणा सँ अभिभूत आ कर्तव्यक मार्ग पर भ्रमित, हम अहाँ सँ ई तय करय लेल कहैत छी जे हमर लेल सबसँ नीक की अछि, किएक तँ हम अहाँक शिष्य छी। हमरा लग शरण मे आउ आ हमरा सिखाउ।

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