गणना - श्लोक पद 62 आ 63

गणना

पद 62 आ 63

ध्यातो प्रत्यन्तरः संगस्थेशुपजयते। सङ्गतसंजयते कामः कामतकरोधो भिजयते। । 2-62। क्रोधित, चिड़चिड़ा, सम्मोहक, स्मृतिभ्रंश। स्मृतिभ्रंश, मानसिक मंदता, मानसिक मंदता।

अनुवाद

.. 2. 62। की ओ व्यक्ति जे कोनो बात पर विचार करैत अछि ओकर प्रति आसक्त भऽ जाइत अछि? आसक्ति कामना आ कामना क्रोध दिस लऽ जाइत अछि...। 2, 63। क्रोध आसक्ति उत्पन्न करैत अछि आ आसक्ति स्मृतिभ्रंश उत्पन्न करैत अछि। जँ स्मृति भ्रमित होइत अछि तँ बुद्धि नष्ट भऽ जाइत अछि आ जँ बुद्धि नष्ट भऽ जाइत अछि तँ मनुष्य नष्ट भऽ जाइत अछि।

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