विश्वरूपदर्शनयोग - श्लोक श्लोक 6

विश्वरूपदर्शनयोग

श्लोक 6

पश्यादित्यान्वसून्रुद्रानश्विनौ मरुतस्तथा |

बहून्यदृष्टपूर्वाणि पश्याश्चर्याणि भारत ||११-६||

अनुवाद

।।11.6।। हे भारत ! (मुझमें) आदित्यों, वसुओं, रुद्रों तथा अश्विनीकुमारों और मरुद्गणों को देखो, तथा और भी अनेक इसके पूर्व कभी न देखे हुए आश्चर्यों को देखो।।

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