विभूतियोग - श्लोक श्लोक 20

विभूतियोग

श्लोक 20

अहमात्मा गुडाकेश सर्वभूताशयस्थितः |

अहमादिश्च मध्यं च भूतानामन्त एव च ||१०-२०||

अनुवाद

।।10.20।। हे गुडाकेश (निद्राजित्) ! मैं समस्त भूतों के हृदय में स्थित सबकी आत्मा हूँ तथा सम्पूर्ण भूतों का आदि, मध्य और अन्त भी मैं ही हूँ।।

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