कर्मयोग - श्लोक श्लोक 42

कर्मयोग

श्लोक 42

इन्द्रियानी परन्याहुरियेँ पर मन। मानसस्तु पर बुद्धिर्यो बुद्धियेः परस्तु साह। 3-42।

अनुवाद

.. 3. 42। (शरीर) सँ परे (श्रेष्ठ) इन्द्रिय कहल जाइत अछि। इन्द्रियसँ परे मन अछि, मनसँ परे बुद्धि अछि, आ बुद्धिसँ परे आत्मा अछि।

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