गणना - श्लोक पद 57

गणना

पद 57

या स्वतंत्राना नहीं हास्ततत्तत्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्ति शुभावाम | नाहिन्दाति नाहत्ति तसे प्रज्तितितिता | 2-57 |

अनुवाद

.. 2. 57। एहन नीक आ अधलाह वस्तुकेँ प्राप्त करबामे कोन प्रसन्न वा घृणा नहि करैत अछि जे सभ जगह बड्ड स्नेहसँ रहित अछि? हुनकर ज्ञान स्थापित (स्थिर) अछि।

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